Join Us
  • Member
  • Sevak
  • हिन्दू धर्म के 5 रहस्यमयी ज्ञान, जानिए....

    ...

    हिन्दू धर्म वेदों पर आधारित धर्म है। वेदों से ही स्मृति और पुराणों की उत्पत्ति हुई है। वेदों के सार को उपनिषद और उपनिषदों के सार को गीता कहते हैं। श्रुति के अंतर्गत वेद आते हैं बाकी सभी ग्रंथ स्मृति ग्रंथ हैं। रामायण और महाभारत इतिहास ग्रंथ हैं।

    वेद की प्राचीनकाल की परंपरा के चलते कई सारे रहस्यमयी ज्ञान या पथों का उद्भव होता गया और इनमें कई तरह के संशोधन भी हुए। दरअसल, यह ज्ञान को एक व्यवस्थित रूप देने की कवायद ही थी। आओ जानते हैं कि वेदों से उत्पन्न इस ज्ञान के कितने रहस्यमयी ज्ञान विकसित हो गए हैं।

    1. गीता : वेदों के ज्ञान को नए तरीके से किसी ने व्यवस्थित किया है तो वह हैं भगवान श्रीकृष्ण। वेदों के सार को वेदांत या उपनिषद कहते हैं और उसके भी सार तत्व को गीता में समेटा गया है। पढ़ें श्रीमद् भगवद् गीता गीता में भक्ति, ज्ञान और कर्म मार्ग की चर्चा की गई है। उसमें यम-नियम और धर्म-कर्म के बारे में भी बताया गया है। गीता ही कहती है कि ब्रह्म (ईश्वर) एक ही है। गीता को बार-बार पढ़ेंगे तो आपके समक्ष इसके ज्ञान का रहस्य खुलता जाएगा।

     2.योग:वेदों से ही योग की उत्पत्ति हुई। समय-समय पर इस योग को कई ऋषि-मुनियों ने व्यवस्थित रूप दिया। आदिदेव शिव और गुरु दत्तात्रेय को योग का जनक माना गया है। शिव के शिष्यों ने ही योग को संपूर्ण धरती पर प्रचारित किया। योग का प्रत्येक धर्म पर गहरा प्रभाव देखने को मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण को योगेश्वर कहा गया है। वशिष्ठ पराशर व्यास अष्टावक्र के बाद पतंजलि और गुरु गोरखनाथ ने योग को एक व्यवस्थित रूप दिया।

    3. आयुर्वेद : आयुर्वेद हमारे ऋषिमुनियों द्वारा दिया गया अनमोल उपहार है।आयुर्वेद शब्द दो शब्दों आयुष्वेद से मिलकर बना है जिसका अर्थ है जीवन विज्ञान। संसार की प्राचीनतम पुस्तक ऋग्वेद में भी आयुर्वेद के अतिमहत्वपूर्ण सिद्धांतों का वर्णन है।आयुर्वेद अथर्ववेद का उपवेद एवं विश्व का आदिचिकित्सा विज्ञान है। आयुर्वेद के प्रथम उपदेशक धन्वंतरि ऋषि को माना जाता है। उसके बाद कई ऋषि और मुनियों ने आयुर्वेद का प्रचार-प्रसार किया। बाद में च्यवन, सुश्रुत और चरक ऋषि का नाम उल्लेखनीय है।

    4. षड्दर्शन: 6 भारतीय दर्शन की उत्पत्ति भी वेदों से है। ये 6 दर्शन हैं 1. न्याय, 2. वैशेषिक, 3. मीमांसा, 4. सांख्य 5. वेदांत और 6. योग। सांख्य एक द्वैतवादी दर्शन है। महर्षि वादरायण, जो संभवतः वेदव्यास ही हैं, का ब्रह्मसूत्र और उपनिषद वेदांत दर्शन के मूल स्रोत हैं।

    5. ज्योतिष : ज्योतिष विद्या के कई अंग हैं जैसे सामुद्रिक शास्त्र, हस्तरेखा विज्ञान, लाल किताब, अंक शास्त्र, अंगूठा शास्त्र, ताड्‍पत्र विज्ञान, नंदी नाड़ी ज्योतिष, पंच पक्षी सिद्धांत, नक्षत्र ज्योतिष, वैदिक ज्योतिष, रमल शास्त्र, पांचा विज्ञान आदि। भारत की इस प्राचीन विद्या के माध्यम से जहां अंतरिक्ष, मौसम और भूगर्भ की जानकारी हासिल की जाती है वहीं इसके माध्यम से व्यक्ति का भूत और भविष्य भी जाना जा सकता है।

    Recent News


     2019-09-20


    Samvad Se Sahmati Ki Or : 20th - 22nd Sept. 2019 near Mumbai

    “Samvad Se Sahmati Ki Or” is a residential training cum workshop for Sevaks & Karyakartas...