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  • जानिए दुनिया के ऐसे इकलौते मंदिर के बारे में जहाँ गजमुखी नहीं बल्कि नरमुखी हैं गणेश जी

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    हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार भारत के हर कोने में भगवान श्री गणेश की पूजा की जाती है। भगवान श्री गणेश को प्रथम पूजनीय देवता माना जाता है। किसी भी देवता की पूजा से पहले श्री गणेश की पूजा की जाती है। यही नहीं किसी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले भी श्री गणेश की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि श्री गणेश की पूजा से कोई भी कार्य सफल हो जाता है। यही वजह है कि कार्य की शुरुआत से पहले इनकी पूजा की जाती है।

    भगवान श्री गणेश के जितने भी मंदिर हैं, उनमें आपने उनके गजमुख वाले स्वरूप को देखा होगा। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहाँ श्री गणेश की प्रतिमा गजमुख रूप में नहीं बल्कि इंसानी रूप में लगाई गयी है। जी हाँ हम जिस मंदिर की बात कर रहे हैं, वह दक्षिण भारत में स्थित है। श्री गणेश के इस मंदिर को आदि विनायक के नाम से जाना जाता है। आपको जानकार हैरानी होगी कि यह पूरी दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहाँ भगवान श्री गणेश के इंसानी रूप की प्रतिमा स्थापित है।

    अपनी इसी ख़ासियत की वजह से यह मंदिर दुनिया के अन्य गणेश मंदिरों से काफ़ी अलग है। इसके अलावा इस मंदिर की एक अन्य ख़ासियत भी है, जिसकी वजह से यह मंदिर लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। आपको बता दें यह एकमात्र ऐसा गणेश मंदिर है जहाँ लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा करते हैं। यहाँ की लोक मान्यता के अनुसार इसी मंदिर में भगवान श्रीराम ने भी अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना किया था।

    आज भी कई लोग इस मंदिर में अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए यहाँ पूजा करने आते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि तमिलनाडु में स्थित ये मंदिर भले ही बहुत बड़ा ना हो लेकिन ये अपनी इसी ख़ूबी की वजह से पूरी दुनिया में जाना जाता है। अक्सर पितृदोष के लिए लोग नदियों के किनारे तर्पण करने जाते हैं लेकिन इस मंदिर की ख़ूबी की वजह से इस जगह का ही नाम तिलतर्पणपुरी पद गया है। तमिलनाडु के कुटनूर से लगभग 2 किलोमीटर दूर तिलतर्पणपुरी नाम की एक जगह है, जहाँ पर श्री गणेश का आदि विनायक मंदिर स्थित है।

    आपको जानकार हैरानी होगी कि इस मंदिर का नाम तिलतर्पणपुरी रखने के पीछे एक ख़ास कारण है। तिलतर्पण पुरी शब्द दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है। तिलतर्पण का अर्थ होता है पूर्वजों को समर्पित और पुरी शब्द का अर्थ होता है शहर, यानी ऐसा शहर जो पूर्वजों को समर्पित हो। तिलतर्पणपुरी में भगवान श्री गणेश के नरमुखी मंदिर के साथ ही भगवान शिव का भी मंदिर है। इस मंदिर के बीच में ही भगवान शिव का मंदिर स्थित है। शिव मंदिर से जैसे ही बाहर निकलते हैं, भगवान गणेश के नरमुखी मंदिर को देखा जा सकता है।


    Source:https://www.newstrend.org/8482/know-about-this-amazing-lord-ganesha-temple/

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