अब लिथुआनिया में भी होने लगे है सनातन संस्कार

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यूरोप के देश लिथुआनिया में आधा भारत बसता है। इस देश में अब भारत को दूसरी माता कहा जाने लगा है। संस्कृत के शब्दों का धनी लिथुआनिया में व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर एक वाद्ययंत्र बजाया जाता है, जिसे कनखल कहते हैं।

लिथुआनिया से आया एक विशिष्ट दल रविवार को हरिद्वार पहुंचा। हरकी पैड़ी के समीप शिव निवास में आयोजित चिंतन बैठक को संबोधित करते हुए दल की नेता इनिजा ट्रिंकुनेने उर्फ गुरुमाता ने कहा कि कभी हिंदुस्तान के निवासी जाकर लिथुुआनिया में बसे थे। लिथुआनिया की संस्कृति हिंदू धर्म से निकली है। वहां की भाषा पर संस्कृत का भारी प्रभाव और समावेष है।

लिथुआनिया के 10 हजार शब्द तो सीधे संस्कृत के शब्द हैं। गुरुमाता ने कहा कि यद्यपि लिथुआनिया में लोग चर्च भी जाते हैं, लेकिन अग्नि देवता की पूजा, जन्म पर नामकरण संस्कार, विवाह संस्कार आदि सनातन धर्म से लिथुआनिया में प्रवेश कर चुके हैं। वहां यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो एक वाद्ययंत्र बजाया जाता है, जिसका नाम कनखल है। उन्होंने कहा कि कनखल जाने पर उन्हें पता चला कि यहां भी त्रिलोकी शिव का निवास है, जो स्वयं गले में अनेक प्रकार के मुंड मालाएं धारण करते हैं।

दक्ष प्रजापिता का भी लिथुआनी संस्कृति में ऊंचा स्थान है। दक्ष को वहां दौसस कहा जाता है, जो स्वर्ग के देवता हैं। वे सभी दिशाओं से देश की रक्षा करते हैं। गुरुमाता ने कहा कि अप्सराओं का वर्णन लिथुुआनी सभ्यता में भी भारत के समान किया जाता है। स्वर्ग और नरक वहां भी हैं।


Source:https://www.amarujala.com/uttarakhand/haridwar/sanatan-rites-are-now-being-started-in-lithuania-too-haridwar-news-drn326345815





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