कपूर से देवी-देवता की आरती और रक्षा सूत्र क्यों बांधा जाता है?

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कपूर जलाकर क्यों की जाती है भगवान की आरती ?

सनातन धर्म में किसी भी धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ में देसी घी के दीए और कपूर से देवी-देवताओं की आरती की जाती है। मान्यताओं के अनुसार आरती करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसके अलावा आरती में कपूर का इस्तेमाल से देवदोष और पितृदोषों का नाश होता है। पूजा के दौरान कपूर की आरती से वातावरण में मौजूद छोटे-छोटे कीटाणु नष्ट हो जाते हैं।


पूजा के बाद कलाई पर क्यों बांधा जाता है कलावा?

हिंदू संस्कृति के अनुसार कुछ मंत्रों के उच्चारण के साथ बांधे गए कच्चे धागे भी अदृश्य कवच की भांति मनुष्य की रक्षा करते हैं। नजर दोष, भूत-प्रेत बाधा के लिए भी ये धागे कारगर सिद्ध होते हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, लाल रंग का संबंध मुख्यतः सूर्य और मंगल ग्रह से है, साथ ही पीला रंग देवताओं के गुरु देवगुरु बृहस्पति का प्रतीक है। बृहस्पति ज्ञान का कारक ग्रह है। मौली बांधने से जहां एक ओर ज्ञान की वृद्धि होती है, वहीं दूसरी ओर साहस, आत्मविश्वास और पराक्रम में वृद्धि होती है।


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