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  • क्यों रथ यात्रा से पहले 15 दिन तक दर्शन नहीं देते भगवान जगन्नाथ?

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    भगवान जगन्नाथ को श्री हरि विष्णु का अलौकिक स्वरूप माना जाता है। हर वर्ष ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा को ‘जगन्नाथ रथ यात्रा’ का उत्सव मनाया जाता है, इससे पहले 15 दिन तक भगवान जगन्नाथ आराम करते हैं। भगवान जगन्नाथ का मंदिर ‘श्री जगन्नाथ पुरी’ भारत ही नहीं, बल्कि पुरे विश्व में प्रसिद्द है।  यह मंदिर भगवान विष्णु के आंठवे अवतार ‘श्री कृष्ण’ को समर्पित है। पुरी के जगन्नाथ मंदिर भगवान विष्णु के चार धामों में से एक है, जिसे हिंदू पुराणों में ‘धरती का बैकुंठ’ कहा गया है। पुराणों के अनुसार, भगवान विष्णु ने पुरी में ‘पुरुषोत्तम नीलमाधव’ के रूप में अवतार लिया था और सभी के परम पूज्य देवता बन गए।

    जगन्नाथ रथ यात्रा

    हर साल के ज्येष्ठ महीने में यहां ‘जगन्नाथ रथ यात्रा’ आयोजित की जाती है, जिसमें देश भर के लाखो श्रद्धालु पहुंचते हैं।ज्येष्ठ पूर्णिमा से आषाण पूर्णिमा तक भगवान जगन्नाथ शीत निद्रा में रहते हैं। इस दौरान उनके पट भक्तों के लिए बंद रहते हैं। इस दौरान पूजा- आरती भी नहीं होती है।

    देव स्नान यात्रा

    जगन्नाथ रथ यात्रा से 15 दिन पहले पहले ‘देव स्नान यात्रा’ करने का प्रावधान होता है। स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ 15 दिन के लिए अणवसर गृह (विशेष कक्ष) में चले जाते हैं। मान्यता के अनुसार जगन्नाथ रथ यात्रा का आरम्भ उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के स्नान के साथ होता है। इसी यात्रा को ‘देव स्नान यात्रा’ कहा जाता है। ज्येष्ठ की पूर्णिमा को पुरे मंत्र उच्चारण के बीच जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का जलाभिषेक कराया जाता है। स्नान के लिए पानी मंदिर के सोने के कुएं से लिया जाता है। कहा जाता है स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ अपने भाई और बहन के साथ बीमार पड़ जाते हैं, जिस कारण वह 15 दिन तक आराम करते हैं और किसी को दर्शन नहीं देते।

    Source:https://hindi.newsd.in/jagannath-rath-yatra-know-all-about-lord-jagannath-and-his-tapmple/


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