करवाचौथ : करवा माता के इस मंदिर में लगती है हजारों की भीड़

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करवा चौथ के व्रत में चौथ माता की पूजा की जाती है। चौथ माता भगवान शिव की पत्नी पार्वती का ही रुप है। चौथ माता का मंदिर राजस्थान के माधोपुर के पहाड़ की एक चोटी पर स्थित है जिसकी स्थापना 1451 ईसवी में राजा भीम ने की थी । जो राजस्थान के प्राचीन मंदिरों में से एक है।आइए जानते है कि क्यों करवा चौथ के दिन लोग 700 सीढ़ियां चढ़कर चौथ माता के इस मंदिर में उनके दर्शन के लिए आते है।

माधोपुर का मेला
करवा चौथ के अवसर पर माधोपुर में मेला लगता है जिसमें हर साल लाखों भक्तगण आते है। चौथ माता को करवा चौथ वाले दिन सुंदर दुल्हन की भांति तैयार किया जाता है और कहा जाता है कि जो सुहागिन इस दिन माता के दर्शन कर लेती है उसे अपने वैवाहिक जीवन में खुशहाली के लिए वरदान प्राप्त होता है ।

भगवान गणेश और भैरवनाथ का मंदिर
चौथ माता के मंदिर की ऊचांई जमीन से 1100 फीट है और इस मंदिर में कुल 700 सीढ़ियां है जिनको पार करके भक्त माता चौथ के दर्शन कर पाते है। इस मंदिर में भगवान गणेश और भैरवनाथ की मूर्ति भी विघमान है।

पर्यटकों की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण
राजपूतों की शैली और संगमरमर के पत्थर से बने चौथ माता के इस मंदिर को देखने के लिए यहां सालभर भीड़ बनी रहती है। करीब 566 साल पुराने इस मंदिर की वास्तुकला देखने वाले के मन को मोह लेती है।

स्थानीय लोगों की मान्यता
यहां के स्थानीय लोगों की मानें तो उनके लिए किसी भी काम की शुरूआत चौथ माता की पूजा के बाद ही होती है। ऐसा करने से शुभ कार्यों में बाधाएं नही आती है ।

कुलदेवी मनाने की प्रथा
बूंदी राजघराने के लोग आज भी चौथ माता को कुलदेवी के रुप में पूजते है और देवी चौथ से अपने घरों की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करते है ।

अखंड ज्योति की ज्वाला
वहां के स्थानीय लागों की मानें तो चौथ माता के मंदिर में सालों से एक अखंड ज्योत जल रही है और करवा चौथवाले दिन इस ज्योति की चमक और बढ़ जाती है ।


Source: https://www.amarujala.com/photo-gallery/spirituality/festivals/karwa-chauth-2019-dos-and-donts-on-karwa-chauth




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