प्राचीन शिवालय में मिले सीढ़ीदार रास्ते, खंडित मूर्ति के रहस्य को जानने में जुटे इतिहासकार

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बागपत में महाभारतकालीन सादिकपुर सिनौली में स्थित प्राचीन शिवालय से प्राप्त खंडित मृणमूर्ति का रहस्य कुषाणकालीन से जुड़ा हो सकता है। इतिहासकारों के अनुसार खुदाई से यहां पर मानव बस्ती के प्रमाण प्राप्त हो सकते हैं। इतिहासकारों का दल जल्द ही सिनौली का दौरा करेगा।

अखबार में  प्रकाशित होने के बाद सोमवार को ग्रामीण शिव मंदिर के नीचे निकली सीढ़ियों और तहखाने की दीवारों को देखते रहे। इस संबंध में जनपद में ऐतिहासिक स्थल सर्वेक्षण समिति के सचिव डॉ. अमित राय जैन का कहना है कि यहां से प्राप्त अवशेषों के चित्रों को देखकर लगता है कि यहां इस प्राचीन मंदिर के नीचे कोई तहखाना या कोई कक्ष या फ्लोर आदि हो सकते हैं। जिस समय सर्वेक्षण किया जाएगा वस्तुस्थिति तब ही सामने आएगी। प्राचीन सभ्यता से जुड़े प्राचीन बस्ती के प्रमाण मिल सकते हैं। यह मूर्ति कुषाण कालीन प्रतीत होती है। इस तरह के चेहरे बनावट और भाव भंगिमा की मूर्तियां ज्यादातर कुषाण कालीन कलाकारों के द्वारा ही बनाई जाती थीं। मूर्ति की रासायनिक प्रक्रियाओं से साफ सफाई की जाएगी तब और अधिक स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी।

शीघ्र ही वह अपने इतिहासकारों के प्रतिनिधिमंडल के साथ सनौली गांव के प्राचीन शिव मंदिर का दौरा कर ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट बनाकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भेजेंगे। डीएम शकुंतला गौतम से भी मांग की जाएगी कि मिल रहे प्रमाणों के आधार पर उपरोक्त स्थल का संरक्षण करने के आदेश जारी किए जाए।

मंदिर के पास बने मकान में रहने वाले ब्रजपाल, अंकुश, रोहन, रवि मान और आसू इसकी जानकारी एएसआई आगरा और दिल्ली को दे चुके हैं। साथ ही एएसआई की साइट पर प्राप्त हुए सीढ़ीदार रास्ते, खंडित मृण मूर्ति के फोटो अपलोड कर चुके हैं। समाजसेवी विपिन पूनिया ने बताया कि एएसआई के अधिकारी ने ग्रामीणों को गांव में जल्द ही आने की बात कही है।

और खुदाई हुई तो मिल सकते है महत्वपूर्ण  पुराने अवशेष
गांव में स्थित हनुमान मंदिर में करीबन वर्षों से रह रहे गुजरात निवासी पुजारी दयालदास का कहना है कि उनके गुरू रघुनाथ दास महाराज ने बताया था कि पहले यहां पर मंदिर नहीं था। यहां पर शिव की एक पिंडी दिखाई दी थी, जब लोगों ने उसे निकालने का प्रयास किया तो पिंडी निकालते समय दूध निकलना शुरू हो गया था। ग्रामीणों ने इससे छोड़कर दूसरे जगह खोदाई की तो उसी के पास नंदी, गणेश की प्राचीन मूर्तियां भी मिली थीं। तभी ग्रामीणों ने यहां पर मंदिर का निर्माण किया था। बताया कि यहां पर पहले यमुना बहती थी और प्राचीन युग में यहां के अवशेष जमीन में दफन हो गए होंगे। यदि यहां पर खोदाई कराई जाए तो ओर भी प्राचीन और महत्वपूर्ण पुरावशेष मिल सकते हैं।

जब इस संबंध में एएसआई दिल्ली के निदेशक डा. संजय मुंजाल से बातचीत की गई तो उनका कहना था कि इसकी सूचना प्राप्त हुई है। जैसे ही महानिदेशक से अनुमति मिल जाएगी वैसे ही पूरी टीम के साथ गांव में जाकर जांच करेगी।

महाभारतकालीन सादिकपुर सिनौली गांव को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित किया जा रहा है। एएसआई आगरा सर्किल ने सादिकपुर को राष्ट्रीय महत्व का पुरातत्वीय स्थल घोषित करने की प्रारंभिक अधिसूचना भी जारी कर रखी है। सादिकपुर, सिनौली में एएसआई तीन चरणों में उत्खनन कर चुकी है। यहां से मिले पुरावशेषों में मानव बस्ती के प्रमाण, ईंटों की दीवार, महिला का कंकाल, जिसके कानों से सोने के आभूषण, शाही ताबूत, मिट्टी की भट्टी, धनुष, मृद भांड़ और तांबे की तलवार आदि मिल चुके हैं। एएसआई अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार 17 जून 2019 को प्रारंभिक अधिसूचना जारी कर चुके हैं, जिस पर आपत्तियां मांगी जा रहीहैं। सिनोली गांव को आगरा सर्किल का 267वां संरक्षित स्मारक बनाने की तैयारी है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान ने 2005 में सिनौली गांव में प्रथम चरण की खुदाई शुरू कराई थी। यहां शवाधान केंद्र से एकसाथ 116 शव मिले थे। इसके बाद 15 फरवरी 2018 को यहां पर एएसआई की महानिदेशक डॉ. ऊषा शर्मा के निर्देश पर पुरातत्वविद डॉ. संजय मंजुल के निर्देशन में दूसरे और तीसरे चरण की खुदाई हुई। खुदाई में महज ढाई फीट नीचे से 5000 वर्ष पुरानी सभ्यता के कुछ अवशेष मिले। इनमें 83 2.5 फीट के सैन्य ताबूत, अश्वचालित साढ़े तीन फीट के रथ और 2.5 फीट की तलवार है। सभी में तांबे का बड़े पैमाने पर प्रयोग हुआ है। ताबूत पर 8 योद्धाओं की उकेरी गईं आकृतियां तांबे से सुसज्जित हैं। इन सभी साथियों को एएसआई के दिल्ली स्थित म्यूजियम में रखा गया है।

सिनौली साइट से रथ और ताबूत के साथ दफन दो योद्धा, उनकी तलवारें, ढाल, मुकुट, सोने और बहुमूल्य पत्थरों के मनके, कवच और पास में ही पांच अन्य लोगों के भी शव मिले थे। एक श्वान का भी अवशेष प्राप्त हुआ था। वही दाल व अन्य अनाज के दाने, चूड़ियां, कंघा, दर्पण, कटोब, मृद भांड और कई रोजमर्रा की चीजें भी मिल चुकी हैं।


Source:https://www.amarujala.com/photo-gallery/uttar-pradesh/baghpat/historians-are-working-to-unravel-mystery-of-history-after-fragmented-statue-recovered-at-baghpat



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