उत्तराखंड के सभी निजी स्कूलों में संस्कृत की पढ़ाई अनिवार्य

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उत्तराखंड में विभिन्न परीक्षा बोर्डो से संबद्ध सभी सरकारी और निजी स्कूलों में अब कक्षा तीन से आठवीं तक संस्कृत विषय को अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाएगा। प्रदेश में संस्कृत को दूसरी राजभाषा का दर्जा दिया जा चुका है। संस्कृत को दूसरी राजभाषा बनाने का निर्णय भी भाजपा सरकार ने लिया था। अब संस्कृत की पढ़ाई को हर स्कूल के लिए अनिवार्य किया गया है।

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने विधानसभा में शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम से वार्ता की। उन्होंने सचिव को सभी सरकारी और निजी स्कूलों में कक्षा तीन से आठवीं तक संस्कृत विषय को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में निजी स्कूलों की ना-नुकुर को सहन नहीं किया जाएगा। किसी स्कूल ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं में संस्कृत पढ़ाने से गुरेज किया तो प्रदेश सरकार एनओसी देने से इन्कार कर देगी।

उत्तराखंड बोर्ड, सीबीएसई और आइसीएसई बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में इसे अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि एनसीईआरटी की किताबों को लागू करने में लापरवाही बरतने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ अब कानूनी कार्यवाही भी की जाएगी। अभी तक स्कूलों के खिलाफ इस मामले में कानूनी कार्यवाही का प्रावधान नहीं है। कानूनी कार्यवाही के लिए नियमावली में व्यवस्था की जाएगी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को राहत देने के लिए एनसीईआरटी की किताबें लागू की गई हैं। उन्हें जानकारी मिली है कि कई निजी स्कूलों ने सरकार के आदेश को लागू करने में ढिलाई बरती। अगले शैक्षिक सत्र से ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। निजी स्कूल एनसीईआरटी के इतर किताबें लागू नहीं कर सकेंगे। ऐसा किया तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी।


Source:https://www.jagran.com/uttarakhand/dehradun-city-sansktrit-education-compulsary-19587688.html

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